नोएडा पुलिस ने एटीएम धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड मुठभेड़ में किया गिरफ्तार, हुआ घायल
- Aug-23-2025
ग्रेटर नोएडा ( जीएन न्यूज, संवाददाता ) ।
सेंट्रल नोएडा की इकोटेक-3 पुलिस ने एक एटीएम धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस और एक ठग के बीच हुई मुठभेड़ के बाद इस रैकेट के मास्टरमाइंड को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह शातिर बदमाश एटीएम में फेविक्विक लगाकर लोगों को ठगता था। मुठभेड़ में घायल होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
मिली जानकारी के अनुसार यह घटना 22 अगस्त की देर रात को हुई जब इकोटेक-03 थाना पुलिस याम्हा कट के पास नियमित चेकिंग कर रही थी। उसी दौरान, एक मोटरसाइकिल पर एक संदिग्ध व्यक्ति आता हुआ दिखाई दिया। जब पुलिस ने उसे रुकने का इशारा किया, तो उसने अपनी मोटरसाइकिल की रफ्तार बढ़ा दी और कच्ची सड़क पर भागने की कोशिश करने लगा। हड़बड़ाहट में उसकी मोटरसाइकिल गिर गई।
खुद को पुलिस से घिरा देख, अपराधी ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नियत से गोली चला दी। आत्मरक्षा में, पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें बदमाश के पैर में गोली लगी और वह घायल हो गया। पूछताछ के बाद, उसकी पहचान सन्नी उर्फ नितेश बाबू (उम्र 22 वर्ष) के रूप में हुई, जो औरैया का रहने वाला है और वर्तमान में मामूरा, गौतमबुद्धनगर में रह रहा था।
पुलिस ने सन्नी के कब्जे से एक तमंचा, एक खोखा कारतूस, एक जिंदा कारतूस, तीन अलग-अलग बैंकों के एटीएम कार्ड और अपराध में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की है।
पुलिस ने बताया कि इस गिरोह का तरीका बेहद शातिर था। सन्नी एटीएम मशीन के कार्ड स्लॉट में फेविक्विक लगा देता था, जिससे ग्राहक का एटीएम कार्ड अंदर फंस जाता था। उसी दौरान, उसके दो साथी, सुमित और संजय, वहां पहुंचते और पीड़ित को हेल्पलाइन नंबर के बहाने सन्नी का नंबर दे देते थे। सन्नी फोन पर बात करते हुए पीड़ित से एटीएम का पिन नंबर पूछ लेता था और उसे बैंक जाकर शिकायत करने को कहता था। जब पीड़ित बैंक चला जाता था, तो सुमित और संजय प्लास का इस्तेमाल कर एटीएम कार्ड निकाल लेते थे और दूसरे एटीएम से पैसे निकाल लेते थे।
पुलिस ने पहले ही सन्नी के दो साथियों सुमित और संजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अब इस मुठभेड़ के बाद, उनके गिरोह के मास्टरमाइंड को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। सन्नी का आपराधिक इतिहास भी है, जिसमें उसके खिलाफ थाना इकोटेक-03 में कई मामले दर्ज हैं।